रबी सीजन की तैयारी के साथ ही किसानों ने चना की खेती की योजना बनाना शुरू कर दिया है। मालवा, निमाड़ और मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में इस बार बारिश सामान्य से कम रही है, जिससे किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि कम पानी में कौन सी चने की किस्म बेहतर उत्पादन दे सकती है। यदि आप भी इस रबी सीजन में चना बोने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए काम की हो सकती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कम पानी वाले क्षेत्रों में सही किस्म का चयन उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसी स्थिति में RVG-204 और JG-11 (जॉकी) दो ऐसी किस्में मानी जाती हैं, जो सीमित नमी की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं।
कम पानी वाले क्षेत्रों में क्यों बढ़ रही है इन किस्मों की मांग?
पिछले कुछ वर्षों में किसानों का रुझान ऐसी किस्मों की ओर बढ़ा है जो कम लागत में बेहतर उत्पादन दे सकें। RVG-204 और JG-11 दोनों किस्में कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों के बीच लोकप्रिय हैं। इन किस्मों की विशेषता यह है कि ये कम नमी की स्थिति में भी फसल को संभालने की क्षमता रखती हैं और समय पर प्रबंधन मिलने पर अच्छा उत्पादन दे सकती हैं।
RVG-204 किस्म की खासियत
RVG-204 किस्म को कई किसान इसकी बेहतर अनुकूलता और स्थिर उत्पादन के कारण पसंद करते हैं। यह किस्म कम पानी की स्थिति में भी अच्छा विकास करती है और फसल का पौधा मजबूत माना जाता है। उचित प्रबंधन और मौसम अनुकूल रहने पर किसान इससे अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
JG-11 (जॉकी) क्यों है किसानों की पसंद?
JG-11 जिसे कई किसान जॉकी चना के नाम से भी जानते हैं, लंबे समय से किसानों के बीच लोकप्रिय किस्म रही है। यह किस्म वर्षा आधारित खेती में भी अच्छा प्रदर्शन करने के लिए जानी जाती है। कम नमी वाले क्षेत्रों में इसकी खेती कई किसानों द्वारा सफलतापूर्वक की जाती है।
चना बुवाई का सही समय
मध्य प्रदेश और मालवा क्षेत्र में चने की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय सामान्यतः 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच माना जाता है। समय पर बुवाई करने से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है।
देरी से बुवाई करने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है, इसलिए किसानों को मौसम और खेत की स्थिति को देखते हुए समय पर बुवाई पूरी करने की सलाह दी जाती है।
बुवाई से पहले किसान इन बातों का रखें ध्यान
चना की अच्छी फसल के लिए केवल किस्म का चयन ही पर्याप्त नहीं है। खेत की तैयारी और बीज प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
- खेत की 2 से 3 जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बनाएं।
- बुवाई से पहले बीज उपचार अवश्य करें।
- संतुलित खाद एवं उर्वरकों का उपयोग करें।
- खेत में उपलब्ध नमी का ध्यान रखें।
- समय पर बुवाई करें।
बीज दर कितनी रखें?
कई किसान बीज दर को लेकर भ्रमित रहते हैं। बीज दर खेत की स्थिति और नमी पर निर्भर करती है।
यदि सूखे में बुवाई कर रहे हैं
यदि खेत में केवल उपलब्ध नमी के आधार पर बुवाई की जा रही है, तो 20 से 22 किलो बीज प्रति बीघा तक उपयोग किया जा सकता है, ताकि पौधों की संख्या पर्याप्त बनी रहे।
यदि पलेवा करके बुवाई कर रहे हैं
यदि किसान पहले सिंचाई (पलेवा) करके उसके बाद बुवाई कर रहे हैं, तो लगभग 15 किलो बीज प्रति बीघा पर्याप्त माना जाता है।
क्या 9 क्विंटल प्रति बीघा तक उत्पादन संभव है?
उत्पादन पूरी तरह मौसम, मिट्टी, नमी, प्रबंधन और किस्म पर निर्भर करता है। यदि किसान समय पर बुवाई करें, सही बीज दर रखें, बीज उपचार करें और फसल का उचित प्रबंधन करें, तो बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। कई क्षेत्रों में किसान उन्नत तकनीक अपनाकर अच्छे परिणाम प्राप्त कर रहे हैं।
किसानों के लिए सलाह
चना की खेती में सफलता का सबसे बड़ा आधार सही समय पर बुवाई और सही किस्म का चयन है। कम पानी वाले क्षेत्रों के किसान RVG-204 और JG-11 जैसी किस्मों पर विचार कर सकते हैं। साथ ही खेत की नमी, बीज उपचार और संतुलित पोषण प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
सही तकनीक, समय पर बुवाई और उन्नत किस्मों के साथ उत्पादन और मुनाफ़ा दोनों बढ़ाए जा सकते हैं। यही कारण है कि इस रबी सीजन में कई किसान कम पानी वाली परिस्थितियों के लिए इन किस्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं।