Garlic Farming: रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों ने लहसुन की बुवाई की तैयारियां तेज कर दी हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात सहित कई राज्यों में अक्टूबर का महीना लहसुन की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। हालांकि केवल सही समय पर बुवाई करना ही पर्याप्त नहींp है। यदि किसान कुछ जरूरी बातों का ध्यान नहीं रखते हैं तो अंकुरण कमजोर हो सकता है, कंद का आकार छोटा रह सकता है और उत्पादन में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।
आपको बता दें कि लहसुन की खेती (Lahsun Ki Kheti) में शुरुआत से की गई छोटी-सी लापरवाही भी बाद में बड़ा नुकसान करा सकती है। ऐसे में बुवाई शुरू करने से पहले इन 5 महत्वपूर्ण बातों का ध्यान जरूर रखें।
1. अच्छी किस्म और गुणवत्तापूर्ण बीज का करें चयन
लहसुन की अच्छी पैदावार की नींव सही बीज पर टिकी होती है। बुवाई के लिए हमेशा बड़ी, स्वस्थ और रोगमुक्त कलियों का चयन करें। इसके साथ ही उच्च उत्पादन देने वाली किस्मों को प्राथमिकता दें।
किसान उंटी लहसुन, सफेद उंटी लहसुन, रियावन लहसुन, सुपर संकर, कटर गोला, महादेव और जी-5 जैसी लोकप्रिय और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों का चयन कर सकते हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का उपयोग करने से अंकुरण बेहतर होता है और कंद का विकास भी मजबूत होता है।
2. बीज उपचार जरूर करें और खेत की गहरी जुताई करें
कई किसान बीज उपचार को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बाद में फफूंद और अन्य रोगों का खतरा बढ़ जाता है। बुवाई से पहले Lahsun बीज उपचार अवश्य करें ताकि शुरुआती अवस्था में फसल रोगों से सुरक्षित रह सके।
इसके साथ ही खेत की गहरी जुताई करें और मिट्टी को भुरभुरी बनाएं। अच्छी तरह तैयार खेत में पौधों की जड़ें तेजी से विकसित होती हैं और फसल की बढ़वार भी बेहतर होती है।
3. खेत में पानी का ज्यादा जमाव न होने दें
लहसुन की फसल जलभराव बिल्कुल पसंद नहीं करती। यदि खेत में पानी जमा हो जाता है तो कलियां सड़ने लगती हैं और कई प्रकार के रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
इसलिए खेत में उचित जल निकासी की व्यवस्था करें। जहां पानी रुकने की संभावना हो, वहां उठी हुई क्यारियों पर बुवाई करना बेहतर माना जाता है। अच्छी जल निकासी से कंद का विकास भी बेहतर होता है।
4. पर्याप्त खाद और पोषक तत्व जरूर दें
लहसुन की फसल से अच्छे आकार के कंद और अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए खेत में पर्याप्त मात्रा में खाद डालना जरूरी है। खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करें।
इसके साथ ही मिट्टी परीक्षण के आधार पर संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें। कई किसान खाद की मात्रा कम कर देते हैं, जिससे कंद का आकार छोटा रह जाता है और उत्पादन प्रभावित होता है। संतुलित पोषण फसल की बढ़वार और उपज दोनों के लिए बेहद जरूरी है।
5. सही समय, सही दूरी और सही गहराई पर करें बुवाई
लहसुन की अच्छी पैदावार के लिए समय पर बुवाई करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। बहुत जल्दी या बहुत देर से बुवाई करने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है। अधिकांश क्षेत्रों में अक्टूबर से नवंबर के बीच का समय लहसुन की बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है।
बुवाई करते समय कतार से कतार की दूरी लगभग 15 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 8 से 10 सेंटीमीटर रखें। कली का नुकीला भाग हमेशा ऊपर की ओर होना चाहिए। सही दूरी और गहराई पर बुवाई करने से कंद का विकास अच्छा होता है और उत्पादन बढ़ता है।
लहसुन की खेती में ये गलती बिल्कुल न करें
कई किसान जल्दी मुनाफे की उम्मीद में बिना बीज उपचार के बुवाई कर देते हैं या फिर खेत की तैयारी पर ध्यान नहीं देते। कुछ किसान जल निकासी की व्यवस्था भी नहीं करते, जिससे बाद में फसल में रोग बढ़ जाते हैं। इसलिए बीज चयन से लेकर खाद प्रबंधन और सिंचाई तक हर चरण पर सावधानी बरतना जरूरी है।
कितनी मिल सकती है पैदावार?
यदि किसान अच्छी किस्म का चयन करें, समय पर बुवाई करें और संतुलित पोषण के साथ फसल का प्रबंधन करें तो लहसुन की फसल से अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है। वर्तमान में उंटी, रियावन, जी-5 और सुपर संकर जैसी किस्में किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
लहसुन की बुवाई का सही समय शुरू हो चुका है। ऐसे में किसान यदि उच्च गुणवत्ता वाले बीज, बीज उपचार, गहरी जुताई, अच्छी जल निकासी, पर्याप्त खाद और सही समय पर बुवाई का ध्यान रखें तो बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। खेती में शुरुआत से बरती गई सावधानी ही बाद में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफे का आधार बनती है।