लहसुन की फसल में जब पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और ऊपर से थ्रिप्स का हमला हो जाता है, तो किसान सबसे ज्यादा परेशान हो जाता है। पीलापन बढ़ने से पौधे की बढ़वार रुक जाती है, गांठ छोटी रह जाती है और आखिर में भारी नुकसान होता है। बहुत से किसान दवा डालते रहते हैं लेकिन सही जानकारी न होने की वजह से फायदा नहीं मिलता। इस लेख में हम बिल्कुल आसान भाषा में समझेंगे कि लहसुन में पीलापन क्यों आता है, थ्रिप्स कैसे नुकसान पहुंचाते हैं और ऐसा कौन-सा सही उपाय है जिससे सिर्फ 10 दिन में पीलापन कम हो, थ्रिप्स खत्म हों और लहसुन का साइज तेजी से बढ़े।
लहसुन में पीलापन आने का असली कारण क्या है?
लहसुन में पीलापन एक ही कारण से नहीं आता। कई बार जमीन में नाइट्रोजन की कमी होती है, जिससे पत्तियां हल्की पीली दिखने लगती हैं। कई बार ठंड ज्यादा पड़ने या पानी सही समय पर न मिलने से भी पीलापन बढ़ जाता है। लेकिन सबसे बड़ा कारण थ्रिप्स जैसे छोटे कीड़े होते हैं, जो पत्तियों का रस चूस लेते हैं। जब पत्ता कमजोर हो जाता है, तो पौधा खाना बनाना कम कर देता है और इसका सीधा असर गांठ के साइज पर पड़ता है।
थ्रिप्स लहसुन की फसल को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं?
थ्रिप्स बहुत छोटे कीड़े होते हैं, जो पत्तियों के अंदर छिपकर रहते हैं। ये बाहर से साफ दिखाई भी नहीं देते, लेकिन नुकसान बहुत तेजी से करते हैं। थ्रिप्स पत्तियों का रस चूस लेते हैं, जिससे पत्तियां पहले हल्की पीली, फिर सूखी और मुड़ी हुई दिखने लगती हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो पूरी फसल कमजोर हो जाती है और लहसुन का वजन नहीं बढ़ पाता।
लहसुन का पीलापन और थ्रिप्स खत्म करने का सही उपाय क्या है?
अगर आप चाहते हैं कि सिर्फ 10 दिन में लहसुन का पीलापन कम हो, थ्रिप्स खत्म हों और पौधा फिर से हरा-भरा दिखे, तो आपको दवा और पोषण दोनों पर ध्यान देना होगा। सबसे पहले थ्रिप्स को खत्म करना जरूरी है, क्योंकि जब तक कीड़ा रहेगा, तब तक खाद भी सही से काम नहीं करेगी।
इसके लिए आप स्पिनोसैड या इमिडाक्लोप्रिड जैसी भरोसेमंद दवा का हल्का छिड़काव करें। दवा की मात्रा ज्यादा न रखें और सुबह या शाम के समय ही छिड़काव करें। छिड़काव करते समय यह ध्यान रखें कि दवा पत्तियों के अंदर तक पहुंचे, क्योंकि थ्रिप्स वहीं छिपे रहते हैं।
पीलापन खत्म करने और साइज बढ़ाने के लिए क्या पोषण देना चाहिए?
थ्रिप्स कंट्रोल के 2 से 3 दिन बाद लहसुन को सही पोषण देना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप पानी में घुलनशील नाइट्रोजन वाली खाद जैसे यूरिया या 19:19:19 का हल्का घोल बनाकर छिड़काव करें। इसके साथ अगर जिंक और सल्फर की थोड़ी मात्रा दी जाए, तो पत्तियों की हरियाली तेजी से वापस आती है।
जब पौधा फिर से हरा होने लगता है, तो वह जमीन से ज्यादा ताकत खींचता है और इसका सीधा असर गांठ के साइज पर पड़ता है। बहुत से किसानों ने देखा है कि सही दवा और पोषण देने से 8 से 10 दिन में ही फर्क साफ नजर आने लगता है।
पानी और सिंचाई का सही तरीका क्या होना चाहिए?
लहसुन में पीलापन बढ़ने का एक कारण गलत सिंचाई भी होता है। बहुत ज्यादा पानी देने से जड़ें कमजोर हो जाती हैं और कम पानी देने से पौधा सूखने लगता है। इसलिए खेत में हल्की नमी बनाए रखें। पानी हमेशा हल्का और जरूरत के हिसाब से ही दें। दवा या खाद देने के एक दिन पहले या अगले दिन भारी सिंचाई न करें, वरना दवा का असर कम हो सकता है।
कौन-सी गलती करने से नुकसान बढ़ जाता है?
बहुत से किसान जल्दबाजी में एक के बाद एक दवा डाल देते हैं, जिससे पौधा और कमजोर हो जाता है। कभी-कभी ज्यादा मात्रा में दवा या खाद देने से पत्तियां जल भी जाती हैं। इसलिए हमेशा सही मात्रा और सही समय का ध्यान रखें। बिना वजह दवा बदलना या बार-बार छिड़काव करना नुकसानदायक हो सकता है।
10 दिन में फर्क कैसे दिखने लगता है?
अगर आपने थ्रिप्स के लिए सही दवा डाली, उसके बाद सही पोषण दिया और सिंचाई संतुलित रखी, तो 7 से 10 दिन में लहसुन की पत्तियां फिर से हरी दिखने लगती हैं। पीलापन धीरे-धीरे कम हो जाता है और पौधे की बढ़वार तेज हो जाती है। इसके बाद गांठ भरने की प्रक्रिया सही तरीके से शुरू होती है और साइज भी पहले से बेहतर होने लगता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख किसानों की सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है। दवा और खाद की मात्रा जमीन, मौसम और फसल की स्थिति के अनुसार बदल सकती है। किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले नजदीकी कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग की सलाह जरूर लें।